शुक्रवार, 11 जुलाई 2008

rangparsai


3 टिप्‍पणियां:

अंगूठा छाप ने कहा…

क्या खूब है भाई!

परसाई को कार्टून में देखना रुचिकर लगा...।

GECJBP1985 ने कहा…

Dear Rajesh, Going through Rangparsai was very stimulating and nostalgic. Stimulating, because it brings out the stark realities of life in such a subtle way. Nostalgic, because when my mother used to read Parsai's literature and used to praise it, I was not able to appreciate it as a kid.
Sketching concepts are wonderful. Keep it up. Wishing you all the best
Mickey

alka sarwat ने कहा…

प्रिय बन्धु
जय हिंद
साहित्य हिन्दुस्तानी पर पधारने के लिए धन्यवाद और kartoon जगत में अपनी आमद दर्ज कराने का शुक्रिया
अगर आप अपने अन्नदाता किसानों और धरती माँ का कर्ज उतारना चाहते हैं तो कृपया मेरासमस्त पर पधारिये और जानकारियों का खुद भी लाभ उठाएं तथा किसानों एवं रोगियों को भी लाभान्वित करें